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सेवाएँ
गृह वास्तु शांति
नवीन गृह प्रवेश एवं वास्तु शांति पूजन — शास्त्रोक्त परम्परा अनुसार पावन गृह आरम्भ हेतु पारम्परिक अनुष्ठान।
अवधि: 3-5 घंटेअक्षय तृतीया, बसंत पंचमी, शुक्ल पक्ष की शुभ तिथियाँ
महत्व
गृह वास्तु शांति नवीन गृह में प्रवेश से पूर्व किया जाने वाला पारम्परिक अनुष्ठान है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार यह सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक कल्याण की भावना से सम्पन्न किया जाता है।
विधि
- 1संकल्प एवं गणपति पूजन
- 2कलश एवं नवग्रह स्थापना
- 3वास्तु पुरुष पूजन
- 4दिशा-देव पूजन
- 5हवन एवं पूर्णाहुति
- 6गृह में मंगल कलश के साथ प्रवेश
- 7ब्राह्मण भोज
आवश्यक सामग्री
• कलश एवं नारियल
• आम/अशोक के पल्लव
• नवग्रह सामग्री
• सप्तधान्य
• पंचगव्य
• हवन सामग्री
• पुष्प, धूप, दीप
• सफेद वस्त्र
किसके लिए उपयुक्त
- ॥नवीन गृह में प्रवेश से पूर्व
- ॥दुकान/कार्यालय आरम्भ हेतु
- ॥गृह नवीनीकरण के पश्चात्
शुभ समय
अक्षय तृतीया, बसंत पंचमी, शुक्ल पक्ष की शुभ तिथियाँ
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पंडित चन्दन भार्गव जी को व्हाट्सएप पर तैयार संदेश भेजें।
यह पृष्ठ शास्त्रीय आधार पर पारम्परिक वैदिक अनुष्ठान का वर्णन करता है। यह सेवा एक आध्यात्मिक अनुष्ठान के रूप में प्रदान की जाती है; यह चिकित्सकीय, क़ानूनी अथवा वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है। फलश्रुति व्यक्तिगत मान्यता का विषय है।