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सेवाएँ
उपनयन (जनेऊ संस्कार)
पवित्र यज्ञोपवीत एवं गायत्री दीक्षा संस्कार — शास्त्रोक्त परम्परा अनुसार सम्पन्न।
अवधि: 3-4 घंटेउपाकर्म, अक्षय तृतीया, बसंत पंचमी विशेष शुभ
महत्व
उपनयन सोलह संस्कारों में से एक है। यह बालक को वेदाध्ययन की पात्रता प्रदान करने वाला पारम्परिक संस्कार है।
विधि
- 1संकल्प एवं गणपति पूजन
- 2मुंडन (यदि शेष हो)
- 3यज्ञोपवीत धारण
- 4गायत्री दीक्षा
- 5भिक्षाटन प्रथा
- 6आचार्य आशीर्वाद
आवश्यक सामग्री
• यज्ञोपवीत (जनेऊ)
• कौपीन एवं उत्तरीय
• दण्ड (पलाश/बेल)
• कुश
• हवन सामग्री
• भिक्षा पात्र
• नैवेद्य
किसके लिए उपयुक्त
- ॥7-16 वर्ष के बालक
- ॥द्विज वर्ण के परिवार
शुभ समय
उपाकर्म, अक्षय तृतीया, बसंत पंचमी विशेष शुभ
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पंडित चन्दन भार्गव जी को व्हाट्सएप पर तैयार संदेश भेजें।
यह पृष्ठ शास्त्रीय आधार पर पारम्परिक वैदिक अनुष्ठान का वर्णन करता है। यह सेवा एक आध्यात्मिक अनुष्ठान के रूप में प्रदान की जाती है; यह चिकित्सकीय, क़ानूनी अथवा वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है। फलश्रुति व्यक्तिगत मान्यता का विषय है।