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सेवाएँ

प्राण प्रतिष्ठा

घर के मंदिर, देवालय एवं नवीन मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा — सम्पूर्ण वैदिक मंत्रों सहित शास्त्रोक्त विधि।

अवधि: 4-6 घंटेदेव-प्रबोधनी एकादशी, अक्षय तृतीया एवं शुभ मुहूर्त
Pran Pratishtha ritual

महत्व

प्राण प्रतिष्ठा वह शास्त्रीय विधि है जिसके द्वारा मूर्ति में देवत्व की भावना से आवाहन किया जाता है। यह पारम्परिक वैदिक अनुष्ठान है।

विधि

  1. 1संकल्प एवं गणपति पूजन
  2. 2कलश स्थापना
  3. 3अधिवास (जल/अन्न/शय्या)
  4. 4नेत्रोन्मीलन
  5. 5प्राण प्रतिष्ठा मंत्र
  6. 6आरती एवं नैवेद्य

आवश्यक सामग्री

• मूर्ति/प्रतिमा
• पंचगव्य
• पंचामृत
• सप्तधान्य
• नवग्रह सामग्री
• रत्न (यथा सम्भव)
• हवन सामग्री
• नैवेद्य

किसके लिए उपयुक्त

  • नवीन देवालय/घर मंदिर
  • नवीन मूर्ति स्थापना

शुभ समय

देव-प्रबोधनी एकादशी, अक्षय तृतीया एवं शुभ मुहूर्त

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पंडित चन्दन भार्गव जी को व्हाट्सएप पर तैयार संदेश भेजें।

यह पृष्ठ शास्त्रीय आधार पर पारम्परिक वैदिक अनुष्ठान का वर्णन करता है। यह सेवा एक आध्यात्मिक अनुष्ठान के रूप में प्रदान की जाती है; यह चिकित्सकीय, क़ानूनी अथवा वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है। फलश्रुति व्यक्तिगत मान्यता का विषय है।

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