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सेवाएँ
दुर्गा पाठ
दुर्गा सप्तशती एवं चण्डी पाठ — आध्यात्मिक बल एवं देवी कृपा हेतु शास्त्रोक्त पारम्परिक अनुष्ठान।
अवधि: 1-9 दिननवरात्रि (चैत्र/शारदीय), अष्टमी एवं नवमी विशेष शुभ
महत्व
दुर्गा सप्तशती देवी की महिमा का सर्वप्रथम पाठ है। नवरात्रि एवं अन्य पुण्य अवसरों पर इसे आध्यात्मिक शक्ति एवं भक्ति भाव से सम्पन्न किया जाता है।
विधि
- 1कलश स्थापना
- 2देवी आवाहन
- 3प्रतिदिन निश्चित अध्यायों का पाठ
- 4कुमारी पूजन
- 5हवन एवं पूर्णाहुति
- 6कन्या भोज
आवश्यक सामग्री
• सप्तशती पुस्तक
• लाल वस्त्र
• लाल पुष्प (गुड़हल)
• कलश
• कुंकुम
• श्रृंगार सामग्री
• नैवेद्य
• दीप-धूप
किसके लिए उपयुक्त
- ॥देवी भक्त
- ॥नवरात्रि साधक
- ॥आध्यात्मिक उन्नति के इच्छुक श्रद्धालु
शुभ समय
नवरात्रि (चैत्र/शारदीय), अष्टमी एवं नवमी विशेष शुभ
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पंडित चन्दन भार्गव जी को व्हाट्सएप पर तैयार संदेश भेजें।
यह पृष्ठ शास्त्रीय आधार पर पारम्परिक वैदिक अनुष्ठान का वर्णन करता है। यह सेवा एक आध्यात्मिक अनुष्ठान के रूप में प्रदान की जाती है; यह चिकित्सकीय, क़ानूनी अथवा वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है। फलश्रुति व्यक्तिगत मान्यता का विषय है।